रक्षाबंधन पत्र
प्रिय बंधुओं एवं सुधिजनों,
मनुष्य की प्रवृत्ति मूलतः घुमंतू होती है। वह बहुत समय तक एक स्थान पर स्थिर नहीं रह सकती। कुछ लोग घूमते-घूमते विभिन्न पर्वत-श्रृंखलाओं और नाना प्रकार की कंदराओं में जा बसते हैं, कुछ की मनोदशा उन्हें जलाशयों एवं तटों के निकट ले जाती है और कुछ तो इतने आगे निकल जाते हैं कि कारागार तक की यात्रा कर आते हैं।
यह मानसिक प्रवृत्ति केवल उनके भौतिक भ्रमण तक ही सीमित नहीं रहती, अपितु उनकी जिह्वा एवं हृदय पर भी अपना अयाचित प्रभाव डालती है। जिह्वा के लोलुप प्राणी यह समझ ही नहीं पाते कि उनका यकृत, आँतें, आमाशय, अग्न्याशय, गुर्दे एवं रक्तचाप आदि भीतर से त्राहि-त्राहि कर रहे हैं। किंतु वे इन निरीह अंगों की करुण पुकार को नज़रअंदाज़ करते हुए मनुष्य की इस जिज्ञासु एवं घुमंतू प्रवृत्ति को चिरंजीवी बनाए रखने में लगे हुए हैं।
ये वही लोग हैं जिन्होंने तीनों युगों के बाद अब चौथे में भी मात्र मनुष्यता को जीवित रखने का बीड़ा उठा रखा है। इनकी इसी साधना को भावयोग कहा जा सकता है, क्योंकि ये मनुष्य मात्र के भावावेश में आकर मानव जाति की प्राचीन प्रवृत्तियों को जीवंत रखने हेतु अपनी जिह्वा और शर्करा को जीवन आहूत कर देते हैं। इसमें कल्पना मात्र भी कर्मयोग अथवा ज्ञानयोग के समतुल्य उपयोग नहीं होता । जिस प्रकार भोजन की यह मुक्तावस्था रोगदशा कहलाती है, उसी प्रकार जिह्वा की मुक्तावस्था रसदशा कहलाती है। जिह्वा की इसी मुक्ति की साधना के लिए मनुष्य का शरीर, जो सदियों से संस्कृति को ढोता आया है, अंततः एक दिन अग्रिम शहादत स्वीकार करने को विवश हो जाता है।
अतः इस रक्षाबंधन पर मैं आप सभी से करबद्ध निवेदन करता हूँ कि शर्करा-त्याग की इस महान परंपरा को आगे बढ़ाने में मेरा सहयोग करें क्योंकि शर्करायुक्त पदार्थों के साथ हमारा यह भावनात्मक संबंध धीरे-धीरे स्वास्थ्यरूपी पाताल की ओर ले जाता है और जैसे-जैसे हमारी वृत्तियों पर असभ्यता के नए-नए आवरण चढ़ते जाएँगे, वैसे-वैसे संस्कृति का नाश होता जाएगा। इस नाश का सारा ठीकरा मैं स्वयं अपने सिर लेने को तैयार हूँ। अतः आप सभी से विनम्र अनुरोध है कि इस रक्षाबंधन पर शर्करायुक्त मिठाइयों से मुझे कदापि न नवाज़ें। इसके स्थान पर डार्क चॉकलेट, नट्स आदि की शहादत मुझे सहर्ष स्वीकार्य होगी।
अंततः, बहन का प्रेम अमर रहे,
भाई का स्वास्थ्य सुरक्षित रहे,
और मिठाई की जगह बादाम-काजू आते रहें।
@निखिल द्विवेदी

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